BCI मान्यता के बिना स्टूडेंट को एडमिशन देने वाले लॉ संस्थानों पर आपराधिक कार्रवाई की जाएगी- मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
राज्य बार काउंसिल द्वारा लॉ ग्रेजुएट को नामांकन से वंचित करने की याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि भविष्य में यदि कोई संस्थान आवश्यक मान्यता के बिना स्टूडेंट को प्रवेश देता है तो उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। ऐसा करते हुए न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि संबद्धता के नवीनीकरण से संबंधित सभी औपचारिकताएं पिछले कैलेंडर वर्ष के 31 दिसंबर तक पूरी कर ली जाएंगी। इस संबंध में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के साथ सभी कार्यवाही कैलेंडर वर्ष के 15 फरवरी तक पूरी कर ली जाएंगी। न्यायालय कुछ लॉ ग्रेजुएट की याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जो राज्य बार काउंसिल द्वारा उन्हें वकील के रूप में नामांकन से इस आधार पर वंचित करने से व्यथित हैं कि जिस कॉलेज से उन्होंने ग्रेजुएशन किया। प्रतिवादी नंबर 5-मध्य भारत विधि संस्थान, जबलपुर ने 2008-2009 के बाद BCI के साथ अपनी स्वीकृति का नवीनीकरण नहीं किया।
चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की खंडपीठ ने कहा, “उपरोक्त निर्देशों के साथ हम संबंधित प्राधिकारी को निर्देश देकर याचिकाओं का निपटारा करते हैं कि यदि भविष्य में कोई भी संस्थान बिना किसी मान्यता के शैक्षणिक उद्देश्य को छोड़कर प्रवेश देता है तो ऐसे संस्थानों के खिलाफ कानून के अनुसार आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। इस स्तर पर हमें कॉलेजों के वकील द्वारा सूचित किया गया कि यूनिवर्सिटी पिछले वर्ष की 31 दिसंबर तक संबद्धता नवीनीकरण प्रक्रिया पूरी नहीं करता, जिसके कारण कॉलेज 31 दिसंबर तक बार काउंसिल ऑफ इंडिया में आवेदन करने में असमर्थ हैं। इसे देखते हुए हम निर्देश देते हैं कि जब संस्थान संबद्धता के नवीनीकरण के लिए यूनिवर्सिटी में आवेदन करते हैं तो सभी औपचारिकताएं पिछले कैलेंडर वर्ष की 31 दिसंबर तक पूरी हो जानी चाहिए और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के साथ इस संबंध में सभी कार्यवाही कैलेंडर वर्ष की 15 फरवरी तक पूरी हो जानी चाहिए,